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Saturday, August 28, 2010

garbhini paricharya

प्रिय मित्रों पिछले पोस्ट में मैंने आपको बताया था की  स्वस्थ संतान की प्राप्ति हेतु स्त्री और पुरुष दोनों को स्वस्थ होना आवश्यक है . स्वस्थ बीज से ही स्वस्थ वृक्ष उत्पन्न होते हैं अब इसके बाद आयुर्वेद में गर्भिणी स्त्री के देखभाल के बारे में बताया गया है उसके आहार और औषध के बारे में बताया गया है की गर्भिणी को प्रत्येक माह किन किन औषध एवं क्या आहार सेवन करना है , इन नियमो का पालन करने से गर्भावस्था में कष्ट नहीं होता तथा प्रसव भी सुगमता एवं सरलता से हो जाता है क्योंकि स्त्री का शारीर मृदु एवं स्निग्ध होता है (सोफ्ट एंड स्मूथ ) होता है स्त्री में बल हानि भी नहीं होती है और वह शीघ्र ही अपने कार्य करने योग्य हो जाती है. गर्भावस्था में स्त्री को हल्का आहार लेना चाहिए क्योंकि गर्भ होने के कारण अग्नि गर्भ के विकास में उपयोग होती है तथा जठराग्नि (digestive पॉवर ) कमजोर होती है और आंत्रो पर दबाव होता है . इस परिचर्या से सबसे  बड़ा लाभ यह है की यह नोर्मल डेलिवरी करवाती है , सिजेरियन की आवश्यकता नहीं होती .
अधिक जानकारी तथा इलाज के लिए संपर्क करें धन्यवाद.

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