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Saturday, January 21, 2012

घी शत्रु नहीं मित्र .......

प्रिय मित्रों नमस्कार ,

वर्ष २०१२ का मेरा यह पहला ब्लॉग है . अतः देर से ही सही किन्तु मेरा अभिवादन स्वीकार करें .  किन्ही व्यस्तताओं के चलते बहुत समय से आप से चर्चा नहीं हो पायी . 
                                                                                               आजकल जिसे देखो वो येही कहता नज़र आता है मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ गया है , कोलेस्ट्रोल बढ़ गया है ; डॉक्टर ने घी तेल चिकनाई का परहेज कहा है ....... एक मरीज़ ने मुझ से कहा की मेरे घुटनों में बहुत दर्द है , मैंने उसे कुछ दवाएं दी और कहा की सुबह खाली पेट २ चम्मच घी खाना है और उसके आधे घंटे तक कुछ नहीं खाना फिर आधे घंटे बाद गर्म पानी पीना है . घी का नाम सुनते ही वो कहने लगा की ये आप क्या कह रहे हैं मैं घी कैसे खा सकता हूँ इससे मेरा कोलेस्ट्रोल बढ़ जायेगा . मैंने कहा मित्र घी की मिठाइयों और खाने के साथ घी का सेवन करने से कोलेस्ट्रोल बढ़ता है न की खाली पेट सिर्फ २ छोटी चम्मच लेने से ......... अब समझिये की मैंने ऐसा क्यों कहा .......... जब आप घी की मिठाई और सब्जियों में घी का सेवन करते हैं तो वो अत्यधिक गुरु यानि की गरिष्ठ होता है . हमारा यकृत (लीवर ) इस अति प्रमाण में उपलब्ध चिकनाई को कोलेस्ट्रोल में बदलता है जो की शारीर के रक्त वाहिनी शिराओं और धमनियों में जाकर जमता है ...... खाली पेट घी खाने पर वह पूरी तरह पच जाता है और वह कोलेस्ट्रोल में बदल नहीं पाता , इस प्रकार वह शारीर की आवश्यकता को पूर्ण करता है . जैसे किसी भी यन्त्र को कार्य करने के लिए चिकने की आवश्यकता होती है , हम मशीन में तेल डालते है तो वह बिना घर्षण के सही कार्य करती है .जब उसमे चिकनाई के साथ धुल जमती है तो वो जाम हो जाती है , उसी प्रकार जब हम आटे के साथ घी अथवा मिठाई के साथ घी खाते हैं तो वो कोलेस्ट्रोल बनने का कारण बनती है ....... दिन भर में मात्र २ से ४ चम्मच घी आपके शरीर की आवश्यकता को पूर्ण कर सकता है दिन भर आपको किसी भी रूप में चिकनाई की आवश्यकता नहीं ...... इसीलिए खाने के साथ घी तेल चिकनाई बहुत ही अल्प प्रमाण में होना चाहिए .......

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