मेरे प्रिय ब्लॉग साथियों, आप सभी को आयु लाइफ क्लिनिक के पूरे स्टाफ की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये . आज हमारे समाज के सामने एक गंभीर समस्या है . वह है एड्स पीड़ितों पर लोगों द्वारा किया व्यव्हार(दुर्व्यवहार) . आज इस रोग को लेकर न जाने कितनी प्रकार की भ्रांतियां फैली हुयी हैं . सबसे पहले मैं आपको ये बता दूं की यह बीमारी संक्रमित रक्त से सामान्य व्यक्ति के रक्त में जाने से होती है . इस बीमारी के फैलने के अनेक कारण हैं . पर न जाने क्यों उस पर चरित्रहीनता का धब्बा लगा देते है .
१. असुरक्षित यौन संबंधों से .
२. संक्रमित रक्त के blood transfusion के कारण
३.गर्भवती स्त्री से गर्भ को,
४. ग्रामीण क्षेत्रों में झोला छाप चिकित्सकों की भरमार होने के कारण एक syringe से अनेक व्यक्तियों को injection लगाने के कारण
कारण कुछ भी हो , लेकिन किसी व्यक्ति को पता चल जाए की उसे एड्स है तो वह मरने के पहले जिन्दा लाश बन जाता है, दोस्तों एड्स का इलाज़ संभव है . आयुर्वेद की संहिताओं में इसका वर्णन मिलता है , आयुर्वेद में इस रोग को राजयक्ष्मा के नाम से जाना जाता है .
इस बीमारी का इलाज़ सिर्फ और सिर्फ आयुर्वेद द्वारा संभव है .
Saturday, August 14, 2010
Friday, August 13, 2010
to be continue
रखवा दी तो कचरा उसके अन्दर काम और आस पास ज्यादा दिखेगा . इसी के चलते उन्होंने अब वोह पेटी भी हटवा दी. खैर अव्यवस्थाओं की भरमार है किस किस की बात करोगे . आज से हम और आप यह प्रण लेते हैं की अपना वोट धर्म जाती समाज के बन्धनों को तोड़ के युवा योग्य एवं शिक्षित व्यक्ति को ही देंगे .
जय हिंद वन्दे मातरम . धन्यवाद मेरी कहा सुनी को झेलने के लिए ,हम और कर भी क्या सकते हैं, मेरे लेख से किसी मह्हान भद्र पुरुष की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो भाई क्षमा करना .
जय हिंद वन्दे मातरम . धन्यवाद मेरी कहा सुनी को झेलने के लिए ,हम और कर भी क्या सकते हैं, मेरे लेख से किसी मह्हान भद्र पुरुष की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो भाई क्षमा करना .
jai hind
प्रिय मित्रों,
प्रत्येक वर्ष की तरह हम इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस अत्यधिक हर्षोल्लास के साथ मनाने को तैयार हैं , आज मैं आपको किसी शारीरिक अथवा मानसिक बीमारी के बारे में न बताकर एक ऐसी बीमारी के बारे में बताना चाहता हूँ जो इन सभी बिमारियों से कहीं अधिक भयंकर और गंभीर है.
वोह बीमारी है भ्रस्टाचार जो की अमीरों और नेताओं से शुरू होकर बाबुओं और चप्रासिओं तक फैली है और अंग्रेजों के ज़माने से चलती आ रही है और फल फूल रही है . इस बीमारी ने देश को खोखला कर दिया है . क्या कभी आपने शासकीय सेवाओं के गिरते स्तर को महसूस किया है / खैर इसके लिए भी हम आप लोग ही दोषी हैं . खाने खीलाने की परंपरा तो इतनी पक्की हो चुकी है की हम और आप इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते क्योंकि हमारी और आपकी आवाज़ नक्कारखाने में तूती की तरह ही है.
वैसे हमारे देश में सफाई नाम की कोई चीज़ है या नहीं जहाँ नज़र दौडाओ वहां कचरा ही दिखेगा. वैसे हमारे अशोक नगर की यह खासियत है की अगर गलती से नगर पालिका ने कचरे का बड़ी
प्रत्येक वर्ष की तरह हम इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस अत्यधिक हर्षोल्लास के साथ मनाने को तैयार हैं , आज मैं आपको किसी शारीरिक अथवा मानसिक बीमारी के बारे में न बताकर एक ऐसी बीमारी के बारे में बताना चाहता हूँ जो इन सभी बिमारियों से कहीं अधिक भयंकर और गंभीर है.
वोह बीमारी है भ्रस्टाचार जो की अमीरों और नेताओं से शुरू होकर बाबुओं और चप्रासिओं तक फैली है और अंग्रेजों के ज़माने से चलती आ रही है और फल फूल रही है . इस बीमारी ने देश को खोखला कर दिया है . क्या कभी आपने शासकीय सेवाओं के गिरते स्तर को महसूस किया है / खैर इसके लिए भी हम आप लोग ही दोषी हैं . खाने खीलाने की परंपरा तो इतनी पक्की हो चुकी है की हम और आप इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते क्योंकि हमारी और आपकी आवाज़ नक्कारखाने में तूती की तरह ही है.
वैसे हमारे देश में सफाई नाम की कोई चीज़ है या नहीं जहाँ नज़र दौडाओ वहां कचरा ही दिखेगा. वैसे हमारे अशोक नगर की यह खासियत है की अगर गलती से नगर पालिका ने कचरे का बड़ी
Thursday, August 12, 2010
i am available online
from now onwards i am also available online for live consultation at http://www.liveperson.com/. . in the section of alternative medicine.
i will do my best to help you in diabetes, cancer. hiv/aids ,and many other diseses and supply medicines .
thank you all,
i will do my best to help you in diabetes, cancer. hiv/aids ,and many other diseses and supply medicines .
thank you all,
Wednesday, August 11, 2010
madhumeh me pairon ki dekhbhal
प्रिय मित्रों ,
सादर नमस्कार लम्बे समय तक इंतज़ार करवाने के लिए क्षमा चाहता हूँ . आज मैं आपको diabetes यानि की मधुमेह मैं पैरों की देखभाल कैसे करें इस के बारे में जानकारी देना चाहूँगा, यह सारी समस्या , पैरों में रक्त संचार के कम होने के कारण एवं बहुत अधिक समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने के कारण होती है . रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ने के साथ वहां रक्त संचार कम होने के कारन होती है . बचाव के उपाय ;-
१. पैरों को स्वच्छ रखें , आरामदायक जूते चप्पल पहने , देखा जाए तो संडल या चप्पल अधिक उपयुक्त है क्योंकि जूतों से हवा पास नहीं होती पसीने के कारण संक्रमण होने की संभावना होती है.
२, समय समय पर पैरों की अंगूठे उंगलिया चलाते रहें .इससे अधिक समय तक बैठकर कम करने वाले लोगों में रक्त संचार सही तरह से होता रहेगा .
३. सुबह शाम accupressure रोलर से पैरों का व्यायाम करें .
४. थकान दूर करने के लिए पैरों को गुनगुने गरम पानी में रखें . एक बाल्टी पानी गर्म करके उसमे एक चम्मच नमक डालकर उसमे पैरों को रखें .
५. सबसे महत्वा पूर्ण सूचना - अपनी रक्त शर्करा (blood suger ) नियमित जांचें .
धन्यवाद्
सादर नमस्कार लम्बे समय तक इंतज़ार करवाने के लिए क्षमा चाहता हूँ . आज मैं आपको diabetes यानि की मधुमेह मैं पैरों की देखभाल कैसे करें इस के बारे में जानकारी देना चाहूँगा, यह सारी समस्या , पैरों में रक्त संचार के कम होने के कारण एवं बहुत अधिक समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने के कारण होती है . रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ने के साथ वहां रक्त संचार कम होने के कारन होती है . बचाव के उपाय ;-
१. पैरों को स्वच्छ रखें , आरामदायक जूते चप्पल पहने , देखा जाए तो संडल या चप्पल अधिक उपयुक्त है क्योंकि जूतों से हवा पास नहीं होती पसीने के कारण संक्रमण होने की संभावना होती है.
२, समय समय पर पैरों की अंगूठे उंगलिया चलाते रहें .इससे अधिक समय तक बैठकर कम करने वाले लोगों में रक्त संचार सही तरह से होता रहेगा .
३. सुबह शाम accupressure रोलर से पैरों का व्यायाम करें .
४. थकान दूर करने के लिए पैरों को गुनगुने गरम पानी में रखें . एक बाल्टी पानी गर्म करके उसमे एक चम्मच नमक डालकर उसमे पैरों को रखें .
५. सबसे महत्वा पूर्ण सूचना - अपनी रक्त शर्करा (blood suger ) नियमित जांचें .
धन्यवाद्
Wednesday, July 21, 2010
parhej
प्रिय मित्रों ,
आजकल हम लोग देख रहे हैं की लोग मधुमेह एवं ह्रदय रोग से ग्रस्त रहते हैं . चिकित्सकों द्वारा उन्हें परहेज की सलाह दी जाती है . परहेज के नाम पर सबकुछ त्याग देते हैं एवं रूखा सूखा भोजन करने लगते हैं . मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य यह है की वास्तव में परहेज किस तरह किया जाना चाहिए. किन्ही परिस्थितियों में पूर्ण रूप से परहेज आवश्यक हो जाता है क्योंकि उसमे रक्त में वसा की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है. उन्हें बिलकुल चिकनाई रहित भोजन करना उपयुक्त है .कुछ समय तक ऐसा करना ठीक है आप तब तक ऐसा करें जब तक लेवल सामान्य न हो जाए. अत्यधिक परहेज करने से शारीर में रूखापन बढ़कर अन्य विकार जैसे त्वचा का सूखना , जोड़ों में तकलीफ कमजोरी आ सकती है . शारीर को ठीक से काम करने के लिए बहुत सारी चिकनाई की जरूरत नहीं होती बहुत थोड़ी सी चिकनाई से काम हो जाता है यहाँ पर एक बहुत महत्वपूर्ण बात जो मैं बताना चाहता हूँ वो यह की protein +fat का संयोग carbohydrate + fat से बेहतर है क्योंकि प्रोटीन dry और rough होता है जो वसा के संयोग से सही संतुलन बनता है वसा में चिकनाई होती है यह संयोग उचित है और हानि कारक नहीं है वहीँ carbohydrate के गुण fat के सामान होने के कारण यह शारीर में जमा होकर शर्करा एवं cholesterol को बढ़ाता है. इसलिए घी एवं चिकनाई का एकदम त्याग करना हानिकारक है अल्प मात्रा में लेना उचित है तथा व्यायाम भी करते रहना चाहिए. प्रोटीन में जैसे चना मूंग सोयाबीन को पानी में गलाकर सुबह थोड़े से घी में सेक सकते हैं
आजकल हम लोग देख रहे हैं की लोग मधुमेह एवं ह्रदय रोग से ग्रस्त रहते हैं . चिकित्सकों द्वारा उन्हें परहेज की सलाह दी जाती है . परहेज के नाम पर सबकुछ त्याग देते हैं एवं रूखा सूखा भोजन करने लगते हैं . मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य यह है की वास्तव में परहेज किस तरह किया जाना चाहिए. किन्ही परिस्थितियों में पूर्ण रूप से परहेज आवश्यक हो जाता है क्योंकि उसमे रक्त में वसा की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है. उन्हें बिलकुल चिकनाई रहित भोजन करना उपयुक्त है .कुछ समय तक ऐसा करना ठीक है आप तब तक ऐसा करें जब तक लेवल सामान्य न हो जाए. अत्यधिक परहेज करने से शारीर में रूखापन बढ़कर अन्य विकार जैसे त्वचा का सूखना , जोड़ों में तकलीफ कमजोरी आ सकती है . शारीर को ठीक से काम करने के लिए बहुत सारी चिकनाई की जरूरत नहीं होती बहुत थोड़ी सी चिकनाई से काम हो जाता है यहाँ पर एक बहुत महत्वपूर्ण बात जो मैं बताना चाहता हूँ वो यह की protein +fat का संयोग carbohydrate + fat से बेहतर है क्योंकि प्रोटीन dry और rough होता है जो वसा के संयोग से सही संतुलन बनता है वसा में चिकनाई होती है यह संयोग उचित है और हानि कारक नहीं है वहीँ carbohydrate के गुण fat के सामान होने के कारण यह शारीर में जमा होकर शर्करा एवं cholesterol को बढ़ाता है. इसलिए घी एवं चिकनाई का एकदम त्याग करना हानिकारक है अल्प मात्रा में लेना उचित है तथा व्यायाम भी करते रहना चाहिए. प्रोटीन में जैसे चना मूंग सोयाबीन को पानी में गलाकर सुबह थोड़े से घी में सेक सकते हैं
Friday, July 9, 2010
adhik duble patle vyakti ko wajan bhadhne hetu
प्रिय मित्रों ,
कुछ लोग अत्यधिक मोटापे से परेशान हैं परन्तु कुछ ऐसे भी हैं जो की बहुत दुबलेपन से भी परेशान हैं .वास्तव में हम यह सोचते हैं की वजन बढ़ने के लिए हमें ठूस ठूस कर खाना जरूरी है जो की गलत है . वास्तव में दुबले को लघु किन्तु स्निग्ध आहार लेना चाहिए इसका कारन ये है की हमें पहले ये समझना होगा की हमारी भोजन पचाने की क्षमता कैसी है. पहले पाचाकग्नी को बढ़ाने की ज़रुरत है . लघु मतलब हल्का जैसे की पहले की तुलना में कम लेकिन चिकनाई के साथ धीरे धीरे पाचक क्षमता बढ़ जाने पर अधिक आहार लें . आहार में कार्बोह्य्द्रेट प्रोटीन तथा वसा की संतुलित मात्रा होनी चाहिए एक ही प्रकार का आहार न लेते रहें .तथा सभी प्रकार की सब्जी थोड़ी थोड़ी मात्र में लें १ कटोरी सब्जी १ कटोरी दाल ४ चपाती घी लगी हुयी १ कटोरी चावल सलाद खीरा टमाटर पत्ता गोभी ये भी होना चाहिए १ गिलास छाछ .खाने के बीच में थोड़ो थोडा पानी पी सकता है.
एक यह भी बात है की एक बार में बहुत सारा खा लेने से अच्छा है ४-४ घंटे के अंतर से थोडा थोडा खाया जाए.
कुछ लोग अत्यधिक मोटापे से परेशान हैं परन्तु कुछ ऐसे भी हैं जो की बहुत दुबलेपन से भी परेशान हैं .वास्तव में हम यह सोचते हैं की वजन बढ़ने के लिए हमें ठूस ठूस कर खाना जरूरी है जो की गलत है . वास्तव में दुबले को लघु किन्तु स्निग्ध आहार लेना चाहिए इसका कारन ये है की हमें पहले ये समझना होगा की हमारी भोजन पचाने की क्षमता कैसी है. पहले पाचाकग्नी को बढ़ाने की ज़रुरत है . लघु मतलब हल्का जैसे की पहले की तुलना में कम लेकिन चिकनाई के साथ धीरे धीरे पाचक क्षमता बढ़ जाने पर अधिक आहार लें . आहार में कार्बोह्य्द्रेट प्रोटीन तथा वसा की संतुलित मात्रा होनी चाहिए एक ही प्रकार का आहार न लेते रहें .तथा सभी प्रकार की सब्जी थोड़ी थोड़ी मात्र में लें १ कटोरी सब्जी १ कटोरी दाल ४ चपाती घी लगी हुयी १ कटोरी चावल सलाद खीरा टमाटर पत्ता गोभी ये भी होना चाहिए १ गिलास छाछ .खाने के बीच में थोड़ो थोडा पानी पी सकता है.
एक यह भी बात है की एक बार में बहुत सारा खा लेने से अच्छा है ४-४ घंटे के अंतर से थोडा थोडा खाया जाए.
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