प्रिय मित्रों ,
आजकल हम लोग देख रहे हैं की लोग मधुमेह एवं ह्रदय रोग से ग्रस्त रहते हैं . चिकित्सकों द्वारा उन्हें परहेज की सलाह दी जाती है . परहेज के नाम पर सबकुछ त्याग देते हैं एवं रूखा सूखा भोजन करने लगते हैं . मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य यह है की वास्तव में परहेज किस तरह किया जाना चाहिए. किन्ही परिस्थितियों में पूर्ण रूप से परहेज आवश्यक हो जाता है क्योंकि उसमे रक्त में वसा की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है. उन्हें बिलकुल चिकनाई रहित भोजन करना उपयुक्त है .कुछ समय तक ऐसा करना ठीक है आप तब तक ऐसा करें जब तक लेवल सामान्य न हो जाए. अत्यधिक परहेज करने से शारीर में रूखापन बढ़कर अन्य विकार जैसे त्वचा का सूखना , जोड़ों में तकलीफ कमजोरी आ सकती है . शारीर को ठीक से काम करने के लिए बहुत सारी चिकनाई की जरूरत नहीं होती बहुत थोड़ी सी चिकनाई से काम हो जाता है यहाँ पर एक बहुत महत्वपूर्ण बात जो मैं बताना चाहता हूँ वो यह की protein +fat का संयोग carbohydrate + fat से बेहतर है क्योंकि प्रोटीन dry और rough होता है जो वसा के संयोग से सही संतुलन बनता है वसा में चिकनाई होती है यह संयोग उचित है और हानि कारक नहीं है वहीँ carbohydrate के गुण fat के सामान होने के कारण यह शारीर में जमा होकर शर्करा एवं cholesterol को बढ़ाता है. इसलिए घी एवं चिकनाई का एकदम त्याग करना हानिकारक है अल्प मात्रा में लेना उचित है तथा व्यायाम भी करते रहना चाहिए. प्रोटीन में जैसे चना मूंग सोयाबीन को पानी में गलाकर सुबह थोड़े से घी में सेक सकते हैं
Wednesday, July 21, 2010
Friday, July 9, 2010
adhik duble patle vyakti ko wajan bhadhne hetu
प्रिय मित्रों ,
कुछ लोग अत्यधिक मोटापे से परेशान हैं परन्तु कुछ ऐसे भी हैं जो की बहुत दुबलेपन से भी परेशान हैं .वास्तव में हम यह सोचते हैं की वजन बढ़ने के लिए हमें ठूस ठूस कर खाना जरूरी है जो की गलत है . वास्तव में दुबले को लघु किन्तु स्निग्ध आहार लेना चाहिए इसका कारन ये है की हमें पहले ये समझना होगा की हमारी भोजन पचाने की क्षमता कैसी है. पहले पाचाकग्नी को बढ़ाने की ज़रुरत है . लघु मतलब हल्का जैसे की पहले की तुलना में कम लेकिन चिकनाई के साथ धीरे धीरे पाचक क्षमता बढ़ जाने पर अधिक आहार लें . आहार में कार्बोह्य्द्रेट प्रोटीन तथा वसा की संतुलित मात्रा होनी चाहिए एक ही प्रकार का आहार न लेते रहें .तथा सभी प्रकार की सब्जी थोड़ी थोड़ी मात्र में लें १ कटोरी सब्जी १ कटोरी दाल ४ चपाती घी लगी हुयी १ कटोरी चावल सलाद खीरा टमाटर पत्ता गोभी ये भी होना चाहिए १ गिलास छाछ .खाने के बीच में थोड़ो थोडा पानी पी सकता है.
एक यह भी बात है की एक बार में बहुत सारा खा लेने से अच्छा है ४-४ घंटे के अंतर से थोडा थोडा खाया जाए.
कुछ लोग अत्यधिक मोटापे से परेशान हैं परन्तु कुछ ऐसे भी हैं जो की बहुत दुबलेपन से भी परेशान हैं .वास्तव में हम यह सोचते हैं की वजन बढ़ने के लिए हमें ठूस ठूस कर खाना जरूरी है जो की गलत है . वास्तव में दुबले को लघु किन्तु स्निग्ध आहार लेना चाहिए इसका कारन ये है की हमें पहले ये समझना होगा की हमारी भोजन पचाने की क्षमता कैसी है. पहले पाचाकग्नी को बढ़ाने की ज़रुरत है . लघु मतलब हल्का जैसे की पहले की तुलना में कम लेकिन चिकनाई के साथ धीरे धीरे पाचक क्षमता बढ़ जाने पर अधिक आहार लें . आहार में कार्बोह्य्द्रेट प्रोटीन तथा वसा की संतुलित मात्रा होनी चाहिए एक ही प्रकार का आहार न लेते रहें .तथा सभी प्रकार की सब्जी थोड़ी थोड़ी मात्र में लें १ कटोरी सब्जी १ कटोरी दाल ४ चपाती घी लगी हुयी १ कटोरी चावल सलाद खीरा टमाटर पत्ता गोभी ये भी होना चाहिए १ गिलास छाछ .खाने के बीच में थोड़ो थोडा पानी पी सकता है.
एक यह भी बात है की एक बार में बहुत सारा खा लेने से अच्छा है ४-४ घंटे के अंतर से थोडा थोडा खाया जाए.
Wednesday, June 30, 2010
aahar sambandhi niyam
आयुर्वेद में आहार किस प्रकार से करना चाहिए , उस बारे में जानकारी भी दी गयी है. स्वस्थ रहने हेतु कैसे भोजन करना चाहिए/
उष्णं - खाना गर्म होना चाहिए. इससे वह भोजन पचाने के लिए उपयोगी पाचन शक्ति को बढ़ता है
स्निग्धं - खाना स्निग्ध अर्थात चिकनाई युक्ता होना चाहिए , जिससे वह आंतो के चलन में सहायक हो.
मत्रावत- मात्र अर्थात quantity का विचार करके ही खाना चाहिए जितनी मात्र आसानी सी पच जाए उतनी ही मात्र लें
जीर्णे- पूर्व में किये आहार के पच जाने के अस्चात ही लें.
अवीर्यविर्रुध्द्हम - वीर्य के विर्रुध्ध नहीं हो जैसे दही और बेसन , शीत और उष्ण एक साथ . दही और मछली एक साथ घी और शहद एक साथ नहीं लेना चाहिए
देश और काल के अनुसार , उचित भोजन लें . न बहुत जल्दी और नाही अधिक विलम्ब से मन लगाकर खाना चाहिए .
खाते समय अन्य विकल्प मन में नाही होना चाहिए मोबाइल बंद रखें और ज्यादा बात न करें .
उष्णं - खाना गर्म होना चाहिए. इससे वह भोजन पचाने के लिए उपयोगी पाचन शक्ति को बढ़ता है
स्निग्धं - खाना स्निग्ध अर्थात चिकनाई युक्ता होना चाहिए , जिससे वह आंतो के चलन में सहायक हो.
मत्रावत- मात्र अर्थात quantity का विचार करके ही खाना चाहिए जितनी मात्र आसानी सी पच जाए उतनी ही मात्र लें
जीर्णे- पूर्व में किये आहार के पच जाने के अस्चात ही लें.
अवीर्यविर्रुध्द्हम - वीर्य के विर्रुध्ध नहीं हो जैसे दही और बेसन , शीत और उष्ण एक साथ . दही और मछली एक साथ घी और शहद एक साथ नहीं लेना चाहिए
देश और काल के अनुसार , उचित भोजन लें . न बहुत जल्दी और नाही अधिक विलम्ब से मन लगाकर खाना चाहिए .
खाते समय अन्य विकल्प मन में नाही होना चाहिए मोबाइल बंद रखें और ज्यादा बात न करें .
Monday, June 21, 2010
अब एच.आई.व्ही पोजिटिव से घबराने की जरूरत नहीं क्लिक करें
अब एच.आई.व्ही पोजिटिव से घबराने की जरूरत नहीं क्लिक करें
Wednesday, June 16, 2010
आहार के बारे में भाग २ विगत पोस्ट से जारी
१ नाश्ते में प्रोटीन एवं फाइबर युक्त पदार्थों का सेवन अधिक करें । आप एक सप्ताह का दिएत प्लान भी कर सकते हैं। कुछ लोग पोहे के अत्यधिक शोकीन होतें हैं पोहा समोसा कचोरी के बिना वे नाश्ता किया नहीं मानते। किन्तु यदि १ दिन दलिया दुसरे दिन कॉर्न फ्लक्स तीसरे दिन पोहा चौथे दिन उबले चने पांचवे दिन वेज सेंडविच (खीरा टमाटर के स्लाइस वाले ) छटवे दिन उबला मूंग aऔर सातवे दिन कचोरी समोसा
२ प्रतिदिन वाक्(२ से३ किलो मीटर ) पर जाना न भूलें ।
३ इन सभी बातों को ध्यान में रखकर पालन करें मोटापा आपको छू भी नहीं पायेगा |
शुभ कामनाओं सहित
२ प्रतिदिन वाक्(२ से३ किलो मीटर ) पर जाना न भूलें ।
३ इन सभी बातों को ध्यान में रखकर पालन करें मोटापा आपको छू भी नहीं पायेगा |
शुभ कामनाओं सहित
डायटिंग / आहार नियमन के बारे में

आज मैं आपको आहार सम्बन्धी जानकारी देना चाहूँगा । जो लोग मोटापे से ग्रस्त हैं तथा वजन कम करना चाहते हैं वोह लोग इन बातों पर ध्यान दे
१ कुछ लोग मोटापा कम करने के लिए खाना पीना बिलकुल कम कर देते हैं अथवा सिर्फ एक समय भोजन करते हैं , इससे कमजोरी आना शरू हो जाती है मोटापा कम तो नहीं होता परन्तु शरीर शिथिल हो जाता है।
२ कुछ लोग घी तेल चिकने (वसा युक्त पदार्थ ) बिलकुल बंद कर देते हैं जो की हानि करक है। इससे शरीर में रूक्षता /रूखापन आता है शरीर कड़क और त्वचा मुरझा जाती है । यहाँ यह बात विचार करने योग्य है की भैंस का घी हानिकारक होता है जिसमे पोली अन्सचुरातेद फैट की मात्र अधिक होने के कारन लेकिन इस की जगह गाय का घी उपयोग में लाया जाता है तो वह हितकर है।
३ कुछ लोग जोश में आकर अंधाधुंध व्यायाम करते हैं तथा सोचते हैं की दो ही दिनों में वजन घटा लेंगे । यह शरीर के लिए अत्यधिक हानिकारक है। वजन कम करना के लिए सबसे सिम्पल वाकिंग जोग्गिंग करें |
लगातार अगली पोस्ट पर ............
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